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लेखनी कहानी -26-Dec-2022

विषय-प्रेम रंग जिन्दगी का, न घोल इसमे पानी
प्रेम रंगों मे हे श्रेष्ठ 
रंग घोलो ना इसमे पानी

प्रेम हे निर्मल 
भाव  प्रेम हे निच्छल 
जल समान ना समझे
वो हे परमेश्वर 

प्रेम हे शाश्वत 
प्रेम ही पुजा 
प्रेम हे समर्पण
प्रेम का गंध 
हे महक ता 

प्रेम हे करिश्मा 
प्रेम अविरत भाव 
जल सम ना उसका 
कोई दुवा ना साथ

 प्रेम को ना करो 
जल मे प्रवाहित 
वो भाव तो हे 
जीवन गाथा 

प्रे म हे मनभावन
साजन की छ बी
दिखे निरंतर 
प्रे म को जल मे डाले 
ओर ना करो इसका 
बलिदान
-स्वरचित
-अभिलाषा देशपांडे


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4 Comments

शानदार

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Renu

27-Dec-2022 09:56 PM

👍👍🌺

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